ज़िन्दगी तेरे नाम कई ख्वाहिशें पड़ी हैं ..
तेरी वादियों में हिचकोले खाती मेरी रातें पड़ी हैं
कभी नर्म सी माटी में बेसुध मैं पड़ी रहूँ,
या कभी उड़ते-उड़ते हर पंछी को, पीछे' छोड़ने की चाहतें पड़ी हैं ..
कभी सारी दुनिया को अपनी एहमियत मैं जताऊँ ,
या कभी बुझते दीये -सी, किसी की बाहों में सिमट जाऊं
आँखें जो खोलूँ फिर मैं खुद को ना ढूंढ पाऊँ ...
..और ऐसी ही सिसकती कईss आँहें पड़ी हैं .!!
मैं दूssर कहीं दूर, किसी हरियाले बाग़ान में पड़ी हूँ
और झिमझिमाती बूँदें उस सफ़ेद आकाश की, मेरी आँखों पे गिर पड़ी हों ..
कोई हड़बड़ नहीं, बड़ी तबियत से खड़ी हूँ !!
और यूँहीं कुछ गुनगुनाते हुए सपनों की अनगिनत लड़ियाँ पड़ी हैं ..
ज़िन्दगी, तेरे नाम कईssss ख्वाहिशें पड़ी हैं!!!
!!~~~~~~~~~~~~~~~`***`~~~~~~~~~~~~~~!!
तेरी वादियों में हिचकोले खाती मेरी रातें पड़ी हैं
कभी नर्म सी माटी में बेसुध मैं पड़ी रहूँ,
या कभी उड़ते-उड़ते हर पंछी को, पीछे' छोड़ने की चाहतें पड़ी हैं ..
कभी सारी दुनिया को अपनी एहमियत मैं जताऊँ ,
या कभी बुझते दीये -सी, किसी की बाहों में सिमट जाऊं
आँखें जो खोलूँ फिर मैं खुद को ना ढूंढ पाऊँ ...
..और ऐसी ही सिसकती कईss आँहें पड़ी हैं .!!
मैं दूssर कहीं दूर, किसी हरियाले बाग़ान में पड़ी हूँ
और झिमझिमाती बूँदें उस सफ़ेद आकाश की, मेरी आँखों पे गिर पड़ी हों ..
कोई हड़बड़ नहीं, बड़ी तबियत से खड़ी हूँ !!
और यूँहीं कुछ गुनगुनाते हुए सपनों की अनगिनत लड़ियाँ पड़ी हैं ..
ज़िन्दगी, तेरे नाम कईssss ख्वाहिशें पड़ी हैं!!!
!!~~~~~~~~~~~~~~~`***`~~~~~~~~~~~~~~!!

Hazaron raaste hain mohabbat bayan karne ke ae dost....
ReplyDeleteMagar dil ek to kar ke tu chahta kya hai?
Self Compo....