Friday, April 15, 2011

Saaath......

मुस्कुराने को लम्हें कम नहीं हैं ..
पर साथ कोई मुस्कुराए तो बात कुछ और हो..

सफ़र लम्बा है, इस बात से कभी शिकायत नहीं रही ..
हाँ, साथ कोई चले तो बात कुछ और हो.....