ज़िन्दगी तेरे नाम कई ख्वाहिशें पड़ी हैं,
मैं डूब रही हूँ, पर तेरी आस अभी बाकी है,
हर तरफ पानी है, पर मेरी प्यास अभी बाकी है ..
कुछ पुराने बुने सपनों की अब भी कड़ियाँ पड़ी हैं !!
क्षितिज दूर है, तू रेत् तक पहुचने दे,
वो किनारे पर इंतज़ार करतीं, कई शिकायतें पड़ी हैं ..
तू थक जायेगी पर डुबो ना सकेगी मुझे,
तैरने की मुझमें शोखियाँ पड़ी हैं !
और शायद किसी लकड़ी की कश्ती मैं बना लूं ..
समंदर की तलहटी में अभी मेरी परछाईयाँ पड़ी हैं,
या शायद, मैं उस मोती को ही पा लूं
जिसकी उम्मीद पे बरसों से मेरी साँसें चल रहीं हैं!
बेजान नहीं हुई हूँ, अभी कई रंगीन बंदिशें पड़ी हैं ..
मेरी कलम की नोक पर तेरे नाम कई सलामियाँ पड़ी हैं ..
सफ़र बहुत लम्बा है अभी मेरी हम-नफ़ज़,
किनारे पर पहुँच कर, तुझे सुकून से सुनाउंगी,
......कि ज़िन्दगी, तेरे नाम, कितनीsssss ख्वाहिशें पड़ी हैं .....!!!
!!!~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~******~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~!!!
मैं डूब रही हूँ, पर तेरी आस अभी बाकी है,
हर तरफ पानी है, पर मेरी प्यास अभी बाकी है ..
कुछ पुराने बुने सपनों की अब भी कड़ियाँ पड़ी हैं !!
क्षितिज दूर है, तू रेत् तक पहुचने दे,
वो किनारे पर इंतज़ार करतीं, कई शिकायतें पड़ी हैं ..
तू थक जायेगी पर डुबो ना सकेगी मुझे,
तैरने की मुझमें शोखियाँ पड़ी हैं !
और शायद किसी लकड़ी की कश्ती मैं बना लूं ..
समंदर की तलहटी में अभी मेरी परछाईयाँ पड़ी हैं,
या शायद, मैं उस मोती को ही पा लूं
जिसकी उम्मीद पे बरसों से मेरी साँसें चल रहीं हैं!
बेजान नहीं हुई हूँ, अभी कई रंगीन बंदिशें पड़ी हैं ..
मेरी कलम की नोक पर तेरे नाम कई सलामियाँ पड़ी हैं ..
सफ़र बहुत लम्बा है अभी मेरी हम-नफ़ज़,
किनारे पर पहुँच कर, तुझे सुकून से सुनाउंगी,
......कि ज़िन्दगी, तेरे नाम, कितनीsssss ख्वाहिशें पड़ी हैं .....!!!
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